धन-धन बाबा कर्षण धन्य माता अमृत बेन रे।
धन-धन बाबा कर्षण धन्य माता अमृत बेन रे।
ललना रे धन ही टंकारा के ग्राम दयानंद जी
जनम ले तेरे ॥
लोक सब दुखित छैले देशो परतंत्र छैले रे x2।
ललना रे उगले पूर्णिमा के चाँद से
राज गुजरात बीचै रे ॥
अबला अनाथ छैली,
माता अपमानित छली रे x2 ।
ललना रे नारी शिक्षा भइली अनिवार्य,
से माता निर्माता भईली रे ॥
जाति समाज छैली,
बड़का- छोटका भेदो छैली रे x2।
ललना रे सब मानव- जाति,
बतावल सुंदर रास्ता दिखावल रे ॥
धूत-अछूत बिमारी छैले,
‘सुशील’ विधर्मी बनलै रे x2 ।
ललना रें बड़का जाति कैंसर हटावल,
छुआ-छूत भगवाल रे ॥
लेखक: आचार्य सुशील, गुरुकुल मधुबनी
गायक: अवधेश आर्य, आर्य समाज मोतिहारी
एडिटिंग: चन्द्रदेव आर्य










