रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

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रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना
यदि अपनी जीवन-नैया को
चाहे पार लगाना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

अरब-खरब धन जोड़ के धर ले
दुनिया भर का राज तू कर ले
इस पारे को अंगारे पर
जो चाहे ठहराना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

द्रव्य धरा में धरा रहेगा
और बैंकों में धरा रहेगा
जिसको कहता मेरा-मेरा
इक दिन होय बेगाना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

मोह माया हो कर अन्धा
भूल गया निज कर्म का धन्धा
जिस दिन पड़े गले में फन्दा
उस दिन हो पछताना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

प्राणों का जो प्राण हमारा
यदि उसमें हो ध्यान हमारा
“ठाकुर” उसकी अमृत छाया
बिन नहीं और ठिकाना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना
यदि अपनी जीवन-नैया को
चाहे पार लगाना
रे मनवा !! ईश्वर के गुण गाना

रचनाकार :-श्री ठाकुर जी
स्वर :- श्रीमती मिथलेश जी