ओ३म् ऽऽऽऽऽऽऽ
ओ३म् ऽऽऽऽऽऽऽ
ओ३म् ऽऽऽऽऽऽऽ
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
जब चिन्ता बहुत सताये
तब ओ३म् नाम का जाप करो
दु:ख अन्तःकरण दुखाये
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
जब उठने लगे हताशा
फैले सब ओर निराशा
पल-पल मनवा घबराये
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
दिल में उलझन भारी हो
या उथल पुथल जारी हो
दिल बात न समझ पाये
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
जब अपने ही मुख मोड़े
सब रिश्ते नाते तोड़े
जन-जन दुश्मन बन जाये
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
उमड़े तूफान भयंकर
पथ पर हों काँटे कंकर
घन घोर अन्धेरा छाए
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
जङ्गल पर्वत सागर में
अग्नि धरती अम्बर में
जब राह नजर न आए
तब ओ३म् नाम का जाप करो
भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्
स्वर :- श्री हरिकिशन जी










