जो भजे हरी को सदा सो ही परम पद पायेगा
जो भजे हरी को सदा (1)
सो ही परम पद पायेगा
देह की माला तिलक (2) और
छाप नहीं किसी काम के (2)
प्रेम भक्ति के बिना नहीं (3)
नाथ के मन भायेगा
जो भजे हरी को सदा
जो भजे प्रभु को सदा
सो ही परम पद पायेगा
छोड़ दुनिया की मौजे
तब बैठ कर एकान्त में (4)
ध्यान धर हरी के चरण का (5)
जनम फिर नहीं आयेगा
जो भजे हरी को सदा
जो भजे प्रभु को सदा
सो ही परम पद पायेगा
दृढ़ भरोसा मन में करके
जो जपे हरी नाम को (6)
कहता है “ब्रह्मानन्द”
ब्रह्म आनन्द बीच समायेगा
जो भजे हरी को सदा
जो भजे प्रभु को सदा
सो ही परम पद पायेगा
रचना :- पूज्य श्री स्वामी ब्रह्मानन्द जी
स्वर :- पार्श्व गायिका पद्मश्री सुधा मल्होत्रा जी
राग :- पहाड़ी










