मन का दीपक बार रे मनवा !

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मन का दीपक बार रे मनवा !

मन का दीपक बार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

ज्योति अन्तर मन की जागे
मिटे जगत् अँधियार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

मन का दीपक बार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

ये तन तो है प्रभु का मन्दिर
भाव समर्पण कर ले अन्तर
अर्पण कर उनके चरणों में
भक्ति भाव उपहार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

मन का दीपक बार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

निर्मल कर ले मन का आँगन
अपने में कर प्रभु का दर्शन
आयेगा खुद आरती करने
सूरज तेरे द्वार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

मन का दीपक बार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

जन्म-जन्म से भटक रहा मन
छूटे ना ये मन की उलझन
ऐसी गुरु से लगन लगा ले (1)
होय आनन्द उपहार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

मन का दीपक बार
रे मनवा !
मन का दीपक बार

स्वर :- साध्वी आनन्दमूर्ति गुरुमाँ

मूल रचनाकार :- पूज्य पण्डित सत्यकाम जी विद्यालंकार