ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,ओ३म् प्यारा रे

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ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा, ओ३म् प्यारा रे

ओ३म् किम॒ङ्ग त्वा॒ ब्रह्म॑णः सोम
गो॒पां किम॒ङ्ग त्वा॑हुरभिशस्ति॒पां न॑: ।
किम॒ङ्ग न॑: पश्यसि नि॒द्यमा॑नान्ब्रह्म॒द्विषे॒
तपु॑षिं हे॒तिम॑स्य ॥

ऋग्वेद 6/52/3

ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे,
सोम-चन्द्र समान शीतल
सद्विचार – समुद्र – लहरी
सर्व दुर्भावों को नष्ट करने हारा,
करने हारा रे !!!

सब मनीषी तुझे पुकारें,
ब्रह्म के रक्षक हो प्रभु प्यारे
सत्य ज्ञान विवेक धर्म की रक्षा करना,
प्रण तुम्हारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

सत्य धर्म पे आँच आती,
बनता रक्षक तू परमार्थी
आस्तिकता के पुष्प खिलाता सबका प्यारा,
सबसे न्यारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

लुप्त हो रहा सत्य जग से
और अविद्या बढ़ रही है
कृपण चोर लुटेरे, लूटें कैसा अनमन,
हाल हमारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

क्यों हैं मिलते निन्दा अपयश
हिंसा दु:ख दुर्भाग्य ये सब
धर्म की गिरती अवस्था, तिमिर छाया,
तिमिर छाया रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

वज्र-प्रहारी बाहु तेरे
फिर विमुख क्यों, सोमपावक
हम पे क्यों अभिशाप गिरता,
उठते उठते फिर दुबारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

अब पुकार हमारी सुन लो,
ब्रह्म-विरोधी भाव हर लो
बल से इसे निर्मूल कर दो,
मन है बिगड़ा, कर सुधारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!
सोम-चन्द्र समान शीतल
सद्विचार समुद्र लहरी
सर्व दुर्भावों को नष्ट करने हारा,
करने हारा रे !!!
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा,
ओ३म् प्यारा रे!!!

रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति जी शेठ
तर्ज :- नीज माझ्या नन्दलाला,
नन्दलाला रे (मराठी गीत)
शीर्षक :- हमारी पुकार सुनो
राग :- इस वैदिक मन्त्र के भजन में कलावती,
देस, यमन रागों का बहुत मनमोहक मिश्रण है |