दिव्य अंकुरों में ईश्वर तेरा ही वास
दिव्य अंकुरों में ईश्वर
तेरा ही वास
फूलों में सुगन्ध लताओं में
तेरा उल्लास
सकल धरा पर सुख साधन
के प्रभु सर्जन हारे
कोटि – कोटि रूप तेरे
कोटि – कोटि नाम तिहारे
लोक में लोकान्तर में प्रभु
तेरा ही प्रकाश
परम ज्ञानी पाते तुझसे
ज्योति-प्रसाद
देव जो समर्पित तुझ पर
करें स्तुति तुझे पुकारें
कोटि – कोटि रूप तेरे
कोटि – कोटि नाम तिहारे
जो भी भक्त करता तुझ पर
पूर्ण विश्वास
तेरे दर से जाए ना वो
कभी खाली हाथ
दोष रहित मन में दर्शन
देते प्रभु पावन प्यारे
कोटि – कोटि रूप तेरे
कोटि – कोटि नाम तिहारे
पड़ा सूना मन मन्दिर
दो ज्ञान का प्रकाश
प्रेम दान देकर मन में
करो सहवास
हर एक श्वास तेरा ऋणी
कैसे तेरा ऋण उतारें
कोटि – कोटि रूप तेरे
कोटि – कोटि नाम तिहारे
तेरी ज्योति से है रोशन
सूर्य – चन्द्र अगणित तारे
कोटि – कोटि रूप तेरे
कोटि – कोटि नाम तिहारे
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई










