वेद प्रचार समारोह : चंडीगढ़
आर्य समाज, सैक्टर 22-ए, चण्डीगढ़
श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार समारोह
📅 23 जुलाई 2025 (बुधवार) से 27 जुलाई 2025 (रविवार) तक
🙏 प्रभो! वेद विद्या का विस्तार कर दो, दुखी भारतवर्ष का उद्धार कर दो।
सादर निमंत्रण
आदरणीय बंधु,
सप्रेम नमस्ते।
हमें अत्यंत हर्ष के साथ सूचित करते हुए गौरव का अनुभव हो रहा है कि आर्य समाज, सेक्टर 22-ए, चंडीगढ़ के पवित्र प्रांगण में आगामी श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार समारोह का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर चंडीगढ़, पंचकूला एवं मोहाली की सभी आर्य संस्थाएं व शिक्षण संस्थान एकत्र होकर वेद-विद्या व ऋषि परंपरा के प्रचार-प्रसार हेतु सहभागी बनेंगे।
इस आयोजन की शोभा बढ़ाने हेतु आर्य जगत के ख्यातिप्राप्त वैदिक विद्वान डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री जी (अमेठी, उत्तर प्रदेश) विशेष रूप से पधार रहे हैं।
आपसे सादर अनुरोध है कि आप अपने परिवार सहित इस पावन अवसर पर पधारकर धर्मलाभ एवं वेद-श्रवण का सौभाग्य प्राप्त करें।
दैनिक कार्यक्रम विवरण
दिनांक: 23 जुलाई से 26 जुलाई 2025
प्रातः काल (7:00 से 9:15 बजे तक)
🔸 संध्या, ऋग्वेद मंत्रों से यज्ञ
▪️ यज्ञ ब्रह्मा: डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री जी (अमेठी, उ.प्र.)
▪️ यज्ञ संचालन: आचार्य अर्जुन देव शास्त्री जी
▪️ वेदपाठ: आर्य वेद विद्या कन्या गुरुकुल, मॉडल टाउन, पानीपत
▪️ उपदेश: संगीता आर्या जी (गंगोह, सहारनपुर)
🔖 विशेष सूचना:
श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में यज्ञोपवीत परिवर्तन एवं नवीन यज्ञोपवीत धारण संस्कार सम्पन्न कराया जाएगा।
सायंकालीन सत्र (5:00 से 8:30 बजे तक)
🔹 ऋग्वेद मंत्रों से यज्ञ, भजन एवं वेदोपदेश
▪️ भजन एवं उपदेश: संगीता आर्या जी (5:00 से 6:30)
▪️ वेदोपदेश/आशीर्वचन: डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री जी (6:30 से 8:15)
▪️ धन्यवाद, शांतिपाठ एवं रात्रिभोज: रात्रि 8:30 बजे

मुख्य समारोह
📍 स्थान: यज्ञशाला एवं वेद भवन
📅 दिनांक: 27 जुलाई 2025, रविवार
प्रातः सत्र
▪️ प्रातः 7:30 – 9:15 बजे: संध्या, ऋग्वेद मंत्रों से यज्ञ व पूर्णाहुति
▪️ प्रातः 9:15 – 10:00 बजे: प्रातराश
▪️ प्रातः 10:00 – दोपहर 1:30 बजे:
वेद भवन में श्रावणी महोत्सव एवं विशेष सत्संग
वक्ता एवं अतिथिगण:
🔸 विशेष उद्बोधन: स्वामी सोमानंद जी (आश्रम, कुरुक्षेत्र, हरियाणा)
🔸 मुख्य अतिथि: श्री धर्मपाल आर्य डी.पी. यादव जी (पूर्व सांसद एवं मंत्री, उ.प्र.)
🔸 मुख्य वक्ता: डॉ. ज्वलन्त कुमार शास्त्री जी (अमेठी, उ.प्र.)
🔸 विशेष वक्ता: आचार्या शीलवन्ती आर्ष विद्यामणि (चंपारण, बिहार)
🔸 भजन: माता वेदकुमारी जी (कैम्बवाला, चंडीगढ़)
🔸 भजनोपदेश: संगीता आर्या जी (सहारनपुर)
कार्यक्रम समापन:
🔚 दोपहर 1:30 बजे: धन्यवाद ज्ञापन, शांतिपाठ एवं ऋषि लंगर
उपनयन संस्कार का महत्व
यज्ञोपवीत धारण करना एक अत्यंत पवित्र एवं जीवनदायिनी वैदिक परंपरा है, जो व्यक्ति को दुर्गुणों से बचाकर सत्य, श्रद्धा और ब्रह्मचर्य की दिशा में प्रेरित करता है। यह संस्कार माता-पिता एवं गुरु के प्रति श्रद्धा, जीवन की मर्यादा एवं आत्म-संयम की शिक्षा प्रदान करता है।
नोट: यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन 23 जुलाई 2025 की प्रातः वेला में किया जाएगा।

विद्वज्जनों का परिचय –
डॉ. ज्वलन्त कुमार
डॉ. ज्वलन्त कुमार संस्कृत के सुविख्यात विद्वान हैं। वे शं. शं. अन्जय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अमेठी (उत्तर प्रदेश) के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। साथ ही, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैज़ाबाद के संस्कृत विभाग के पूर्व समन्वयक एवं प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका वैदिक पा के पूर्व सम्पादक भी रहे हैं।
पिछले पाँच दशकों से वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रहते हुए आपने अब तक 20 पुस्तकों की रचना की है, जिनमें से तीन विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित हैं। प्रमुख कृतियों में वेद और वेदार्थ, ऋषि दयानन्द और आर्य समाज (दो भागों में, कुल 1260 पृष्ठ), आदि सम्मिलित हैं।
आपने ऋषि दयानन्द की प्रमाणित जन्मतिथि — 12 फरवरी 1825 ई. (फाल्गुन कृष्ण दशमी, संवत् 1881 विक्रमी) — को प्रमाणिक किया है, जिसे सार्वदेशिक सभा द्वारा भी मान्यता प्राप्त है।
डॉ. कुमार पूर्व में शास्त्री धर्मार्थ सभा के सदस्य भी रहे हैं। दिनांक 17 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गठित “ऋषि दयानन्द की द्विशताब्दी जन्मशती समिति” में उत्तर प्रदेश से उन्हें वैदिक विद्वान के रूप में मनोनीत किया गया।
डी. पी. यादव
श्री डी. पी. यादव का जन्म 25 जुलाई 1948 को उत्तर प्रदेश के सर्फाबाद (नोएडा, गाज़ियाबाद) में हुआ। आप स्वतंत्रता सेनानी एवं आर्य समाज के कट्टर अनुयायी महाशय तेजपाल आर्य जी के सुपुत्र हैं।
आपके परिवार का वैदिक और क्रांतिकारी चेतना से गहरा संबंध रहा है। आपने अनेक गुरुकुलों और आर्य समाजों को सशक्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, कई शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और शुगर मिलों के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार प्रदान किया है।
आप भारत के सांसद, विधायक और पूर्व मंत्री के रूप में सक्रिय रह चुके हैं तथा वर्तमान में अपनी राजनैतिक पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल का संचालन कर रहे हैं। आपका संपूर्ण परिवार वेद-मंत्रों के अभ्यास में निपुण है और स्वाभिमान एवं राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा का स्रोत है।
विदुषी संगीता आर्या
विदुषी संगीता आर्या जी का जन्म उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद स्थित इस्लामनगर (गंगोह) में हुआ। आपके आर्य संस्कार दादा-दादी और माता-पिता से विरासत में प्राप्त हुए। बचपन से ही आपने यज्ञ, संध्या और आर्य समाज के उत्सवों में सहभागिता की।
9 वर्ष की आयु में आपने आर्य मंचों पर भजन प्रस्तुत करने प्रारंभ कर दिए। 8वीं कक्षा के उपरांत आपने सोनीपत (हरियाणा) में अपनी बुआ संतोष आर्या जी से भजन-उपदेश एवं हारमोनियम का विधिवत अध्ययन किया।
आप हिन्दी और संस्कृत विषयों में एम.ए., बी.एड. हैं। विगत 20 वर्षों से आप भजनोपदेश, संगीतमयी श्रीरामकथा, श्रीकृष्णकथा, विवाह व अन्य वैदिक संस्कारों के माध्यम से आर्य समाज के मिशन को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रही हैं।
आचार्या शीलवन्ती (आर्प विद्यावाणि)
आचार्या शीलवन्ती जी का जन्म बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण जनपद में हुआ। बचपन से ही उन्होंने आर्य विचारधारा को आत्मसात किया। प्रारम्भिक शिक्षा के उपरान्त आपने आर्य कन्या गुरुकुल शिवगंज, राजस्थान में प्रवेश लिया और वहाँ से संपूर्ण संस्कृत शिक्षण (प्रारम्भिक स्तर से लेकर महाभाष्य तक) पूर्ण किया।
आपने साहित्याचार्य, व्याकरणाचार्य, बी.एड. सहित कई उपाधियाँ प्राप्त की हैं और अनेक वैदिक ग्रंथों का कंठस्थ अभ्यास किया है। विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आप विजयी रही हैं। वर्तमान में आप शिवगंज गुरुकुल में अध्यापन कार्य में संलग्न हैं तथा जे.आर.एफ. की तैयारी कर रही हैं।
कुमारी सुखदा आर्या
कुमारी सुखदा आर्या का जन्म उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में एक आर्य विचारधारा से ओतप्रोत कृषक परिवार में हुआ। वर्तमान में आप महर्षि दयानन्द आर्य कन्या गुरुकुल, मॉडल टाउन, पानीपत में अध्ययनरत हैं और 12वीं (उत्तरमध्यमा द्वितीय वर्ष) की छात्रा हैं।
आपने पञ्चोपदेश (अष्टाध्यायी, धातुपाठ, उणादिकोष, लिङानुशासन, गणपाठ), यजुर्वेद तथा प्रथमावृत्ति स्मरण जैसे विषयों में प्रवीणता प्राप्त की है। अनेक शास्त्रीय प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर आपने अपने गुरुकुल व गुरुजनों को गौरवान्वित किया है। वर्तमान में आप काशिका का गहन अध्ययन कर रही हैं।
मुख्य सहयोगी परिवार
श्री शैलेन्द्र वर्मा, श्री सुभाष महाजन, श्री अवनीश चौहान, श्रीमती उमा खोसला, डॉ. एम. पी. गुप्ता, श्री नरेश मल्होत्रा, श्री मधुकर कौड़ा, श्री गौरव सेठी, श्री गौरव भल्ला, माता मोनिका सेठ परिवार, श्री सुशील कुमार विशंभु, श्री अजय कपूर, श्री जगदीप सिंह (सरपंच), श्री रविन्द्र आर्य (माजरी गांव), श्रीमती सुशीला भट्ट, श्रीमती स्वर्णलता, श्री दीपक अग्रवाल, श्री सुदेश महाजन एवं खंडूजा परिवार (सैक्टर 18, चण्डीगढ़), श्री योगराज चौधरी (सैक्टर 32, चण्डीगढ़), श्री अजय गुप्ता एवं अन्य सभी सम्माननीय सहयोगीगण।

निवेदक मंडल
- प्रधान – श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्ता
- मंत्री – श्री विजय आर्य
- कोषाध्यक्ष – श्री ईश्वर कुमार आर्य
- वरिष्ठ उपप्रधान – श्री राजेन्द्र सेठी
- उपप्रधान – श्री कमल कृष्ण महाजन
- उपमंत्री – श्री लक्ष्मण प्रसाद शास्त्री
- प्रचार मंत्री – श्री राम गुप्ता
- पुस्तकालयाध्यक्ष – श्री जंगशेर जी
- लेखा निरीक्षक – श्री अशोक भनोट
- आर्य वीर दल प्रतिनिधि – श्री ओमेश्वर शर्मा एवं श्री अनिल स्वरूप वालिया
अन्तरंग सदस्यगण
- श्री नरेश कुमार निझावन
- श्री यशवीर शर्मा
- श्री नरेंद्र कुमार शास्त्री
स्त्री आर्य समाज, सैक्टर 22-ए, चण्डीगढ़
- प्रधाना – श्रीमती सुनीता चन्दवानी
- मन्त्राणी – श्रीमती उषा जोशी
- कोषाध्यक्षा – श्रीमती उर्मिल अरोड़ा
साथ ही आर्य समाज, सैक्टर 22-ए, चण्डीगढ़ के सभी सक्रिय सदस्यगण।
विशेष सूचना
🔹 प्रातः यज्ञ में प्रतिदिन सपत्नी चार यजमान सम्मिलित होंगे।
🔹 पूर्णाहुति के दिन पाँच हवन कुण्डों पर सपत्नीक यजमानों की व्यवस्था की जाएगी।
🔹 यजमान बनने हेतु आचार्य श्री अर्जुनदेव जी (मो. 9456621926) या मंत्री/प्रवक्ता से संपर्क करें।
🔹 यज्ञ के लिए हवन सामग्री, घी, शाकल्य आदि का सहयोग करें।
🔹 ऋषि लंगर हेतु आटा, दाल, चावल, घी, चीनी, सब्ज़ियाँ आदि का सहयोग सादर अपेक्षित है।
संपर्क सूत्र
- कार्यालय: 0172-4630793
- प्रधान – श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्ता: ☎️ 9216139740
- मंत्री – श्री विजय आर्य: ☎️ 9988505690
नोट: आयोजकों को कार्यक्रम में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने का अधिकार सुरक्षित है।
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