खेल में था एक दिन मशगूल शिवाजी

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खेल में था एक दिन मशगूल शिवाजी

खेल में था एक दिन मशगूल शिवाजी,
माता बोली बात मेरी गया भूल शिवाजी।।टेक ।।

शिवाजी के साथ में कुछ बच्चे कुचाली,
आपस में लड़-लड़कर के सब दे रहे थे गाली,
बढ़ा ली क्यों तकरार, तैने फिजूल शिवाजी।।1।।

बचपन का होता है निराला रंग गात में,
हुआ खेल में मस्त आज बच्चों के साथ में,
हाथ में लेकर उड़ा रहा था धूल शिवाजी।।2।।

एक बच्चे ने कहा शिवा तेरी माता रो रही,
खेल रहा तू खेल वह आंसू से मुंह धो रही,
हो रही यह बात नियम प्रतिकूल शिवाजी।।3।।

सुन बच्चे की बात जहां थी जननी माई।।
शोभाराम ने देखकर आवाज लगाई,
भाई अपने भूल गया तू उसूल शिवाजी।।4।।