लोहे से डरकर घर आया

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लोहे से डरकर घर आया

लोहे से डरकर घर आया,
बेटा जान बचाने को,
यहां भी लोहा लेकर के
महामाया चली डराने को।। टेक ।।

वहां से भागा यहां पर आया,
फिर कर पीछे नहीं लखाया,
खुद ही वह गर्दिश का सताया,
तू भी चली सताने को।।1।।

डरे हुए को मतना डरावे,
कढ़ाई खुरचना छिपा के धर दे,
पानी गर्म जल्दी से कर दे,
अपने पति के नहाने को।।2।।

अस्त्र शस्त्र ले बांध कमर में,
बेटी चल मेरे साथ समर में,
अपने पति को छोड़ दे घर में,
करके भेष जनाने को।।3।।

शोभाराम यह सुनकर बात,
यशवन्त सिंह का भभका गात,
अस्त्र शस्त्र ले साथ,
चला दुश्मन का खून बहाने को।।4।।