मने जलसा दिखा दे हो
(धुन तैने न्युं हाथों पै राखूंगी)
मने जलसा दिखा दे हो,
हो ननदी के बीरा,
ज्ञान गंगा में न्हुआदे हो हो ननदी के बीरा,
तैने न्यूं हाथों पै राखूंगी हो ननदी के बीरा।
देखो कैसे आनन्द छाये हो हो ननदी के बीरा,
बड़े-बड़े विद्वान आये हो ननदी के बीरा,
मैंने भी दर्शन करादे हो हो ननदी के बीरा,
ज्ञान गंगा में न्हुवादे हो हो ननदी के बीरा।।1।।
वो तो पाखंडों का खंडन करें हो ननदी के बीरा,
धार्मिक कामों का मंडन करें हो ननदी के बीरा,
वेद वाणी सुनवादे हो-हो ननदी के बीरा,
ज्ञान गंगा में न्हुवादे हो हो ननदी के बीरा।।2।।
विधि गायत्री के जाप की हो ननदी के बीरा,
जड़ें काटती हैं पाप की हो ननदी के बीरा,
मैंने भी संध्या सिखादे हो हो ननदी के बीरा,
ज्ञान गंगा में न्हुवादे हो हो ननदी के बीरा ।।3।।
सबसे उत्तम महिमा दान की हो ननदी के बीरा,
प्रेमी ऋषियों ने बखान की हो ननदी के बीरा,
दान गुरुकुल में भिजवादे हो हो ननदी के बीरा,
ज्ञान गंगा में न्हुवादे हो हो ननदी के बीरा ।।4।।










