औरंगजेब बादशाह हिन्दू कन्या से निकाह
औरंगजेब बादशाह,
हिन्दू कन्या से निकाह,
करना चाहते थे बलात,
कन्या को जब हुआ ज्ञात ।।
उदयपुर नरेश को
भेजकर संदेश को।
कहा धर्म की रक्षार्थ,
रूपवती के हितार्थ ।।
शीघ्रता से आइये,
पुण्य यह कमाइये।
विलम्ब जो करोगे आप,
आपको लगेगा पाप ।।
करुण क्रंद समाचार
सुनकर चूडावत सरदार।
राणा के आदेश पर,
अपना जंगी भेष कर।।
दल बल फरेब से
लड़ने औरंगजेब से,
सेना लेकर साथ में,
चल दिया प्रभात में ।।
आ गई पत्नी की याद,
हृदय में हुआ अवसाद,
निज पत्नी से मोह कर,
कर्तव्य से विद्रोह कर।।
युद्ध के लिबास में
पहुंच गया रनवास में।
हाड़ी रानी बोली ऐसे,
इस लिबास में यहां कैसे ।।










