आ लौट के आजा दयानन्द
आ लौट के आजा दयानन्द,
तुझे हम आज बुलाते है
तेरा महका हुआ है गुलशन,
तुझे हम आज बुलाते है ।
१. शिवजी का व्रत कर शंका त्याग
कर निकला था जोगी निराला,
नारी का उद्धार किया,
महा उपकार किया राह को दिखाने वाला,
तुझे बाँधती है मन में उमंग –
हम आज बुलाते है……
२. लोगों को अमृत दिया खुद ने
जहर पिया स्वामी थे भाव निराले
सबका कल्याण किया विद्या का
दान जग में किये थे उजाले
मेरे ऐसे थे स्वामी दयानन्द –
हम आज बुलाते है……
३. वेदों का ज्ञान है बड़ा हो महान है
ऋषि ने था जो सुनाया
कैसा निराला ज्ञान सारे जगत का
मान स्वामी तू फिर से सुनाया
तू ने जीने का सिखाया नया ढंग
तेरी सब याद मनाते है –
हम आज बुलाते है……










