जीवन सँवार लो,

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जीवन सँवार लो,

तर्ज: तुम….पुकार लो

जीवन सँवार लो,
इक ओ३म् नाम ही जीवन का आधार है ॥ जीवन सँवार लो…

क्यों जगत में आया ना तुझको ख़बर
जो मिला है जीवन ना उसकी कदर
रेत के महल बनाता तू मन ही मन
क्यूँ खा रहा है ठोकर तू बार-बार हैं ॥ जीवन सँवार लो…

अहंकार है तेरा, निराधार है
लोभ से रहा तुझको सदा प्यार है
चुन रहा है काँटे ही काँटे दिन व दिन
क्यूँ ना चमन सी तेरे जीवन में बहार हैं ॥ जीवन सँवार लो…

कर सका न तू इन्द्रियों का दमन
माया के फेर में ही खो दिया अमन
जा रहा है राह उलटी फिर भी ना शरम
तू जान बूझकर बना क्यूँ लाचार है ॥ जीवन सँवार लो…

जो तू जान लेगा क्या है जीवन
क्यों न फिर तू आएगा प्रभु की शरण
जाएँगे तेरे सत्कर्मों में कदम
तू कर ले भजन, जो तुझको प्रभु से प्यार है ॥ जीवन सँवार लो…

(चमन) फुलवारी (शरम) लज्जा (बहार) फुलों के खिलने का समय, वसन्तऋतु
(दमन) वश में रखना (लाचार) विवश (कदम) डग