लाखों कष्ट उठाए ऋषि ने कष्टों से संग्राम किया
तर्ज: भोली सूरतवाले तूने
लाखों कष्ट उठाए ऋषि ने कष्टों से संग्राम किया
तपकर चमका कुन्दर जैसा सकल जगत में नाम किया ॥
सहरा खार और खाई पर्वत ढूँढ़ते ढूँढ़ते सच्चे शिव को
सहा वेदनाओं को, ऋषिवर ने धीरज से ही काम लिया
आखिर मंजिल मिली ऋषि को विरजानन्द के चरणों में
ग्राम ग्राम और नगर वेद प्रचार का काम किया ॥
भूले भटके गुमराहों को अन्धकार में देख ऋषि
अपने ज्ञान विवेक से ऋषि ने गिरतों का उत्थान किया
ढोंगी और मक्कार फरेबी अपना पन्थ चलाते रहे
डरा नहीं वो शेर दिल स्वामी हर खंडन सरेआम किया ॥
मातृशक्ति सति को वेद की शिक्षा का अधिकार दिलाया था
और गौ अनाथ को नया ही जीवन दान दिया !!
दैनिक यज्ञ की प्रथा चलाई वेदों के उपदेश दिए
किया यज्ञ नित बने यज्ञमय, सकल कर्म निष्काम किया ॥
स्वामी करो दयानन्द ने जो चाहा सत्य ज्ञान प्रकाश करो
करो स्वप्न साकार ऋषि का जिसके लिए बलिदान दिया ॥










