आओ हे आओ हे-हे बहनों झूलणा चले बाग में

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आओ हे आओ हे-हे बहनों झूलणा चले बाग में

आओ हे आओ हे-हे,
बहनों झूलणा चले बाग में,
म्हारी तीज रंगीली आ गई। टेक

काले-काले बादल घिर रहे री,
जल बरसाते फिर रहे री,
ऐरी मद जोवन बाग तड़ाग में, म्हारी तीज….

हरियाली चहुं ओर है,
बोलें पपीहा कहीं मोर हैं,
हे री कोयल के सुरीले राग में, म्हारी तीज…

सब पेड़ हिलोरे ले रहे,
फूलों के रस भौरे ले रहे,
बिजली की कसिस काले नाग में, म्हारी तीज…

मनिहारी दे बोल री,
रही गली-गली में डोल री,
हेरी चूड़ी का रंग सुहाग में, म्हारी तीज…

सब ताल तालड़ी भर रहे री,
जिनके पिया ना घर रहे री,
हेरी वह जलें विरह की आग में, म्हारी तीज…

शोभाराम प्रेमी कहीं गा रहा री,
सुने नगर सब जा रहा री,
हेरी कोई झुर-झुर मरे दुहाग में, म्हारी तीज…