आज के जमाने में
आज के जमाने में,
धर्म के बहाने में,
एक-एक दो-दो आने में,
ईमान बिकते देखे हैं।
प्यार में तकरार में,
नकद में उधार में,
काशी मथुरा हरिद्वार में,
यज्ञमान बिकते देखे हैं।।1।।
रुपये पैसे और दानों में,
सब तीर्थ स्थानों में,
जयपुर की दुकानों में,
भगवान बिकते देखे हैं।।2।।
टंडी में और झंडी में,
ब्लैक वाली डंडी में,
कांटे पै और मंडी में
किसान बिकते देखे हैं।।3।।
रोजाना उत्पातों में,
कस्बे शहर देहातों में,
बिना पढ़ों के हाथों में
विद्वान बिकते देखते हैं।।4।।
जलसों में रंगरलियों में,
कोठियों हवेलियों में, थैलियों में,
मंत्री और प्रधान बिकते देखे हैं।।5।।
लाइसैंसों में कोटो में,
परमिटों में नोटों में,
गवर्नमेंट के वोटों में,
ऐलान बिकते देखे हैं।।6।।
आज के व्यवहारों में,
गरीबों में साहूकारों में,
पूजा तर्पण बाजारों में,
दान बिकते देखे हैं।।7।।
शोभाराम कहीं नहीं जाती,
कहते हुए फटे हैं छाती,
हमने पशुओं की भांति,
इंसान बिकते देखते हैं।।8।।










