अपने देश अपने ग्राम से भी नहीं प्यार है

0
9

अपने देश अपने ग्राम से भी नहीं प्यार है

अपने देश अपने ग्राम से भी नहीं प्यार है
जाने कैसे लोग हैं ये जाने क्या विचार हैं
गलियों में खड़ंजे और नालियां बनाई ना
खड़ंजे भी है तो उनके ऊपर की सफाई ना
रोशनी के लिये लालटैन भी लगाई ना
लालटैनें भी हैं तो वे रात को जलाई ना
ऊंचे नीचे रास्तों पर छाया अन्धकार है
जाने कैसे….।।1।।

गांव की हालत को देखों बहुत ही खराब है
कहीं पर है कूडा टट्टी कहीं पैशाब है
नियम नहीं धर्म नहीं ना कोई हिसाब है
बे मुहारे हो रहे हैं शर्म है ना दाव है
कुत्तों जैसा आज भाई-भाई में तकरार है
जाने कैसे…।।2।।

लड़के और लड़कियों के गांव में स्कूल ना
सत्य बोलो क्या यह भारी जिन्दगी में भूल ना
डालियां मुर्झा गई और आये जिन पर फूल ना
इस दशा में फल की आशा करना क्या फिजूल ना
मनुष्यों को रोटी नहीं ना पशुओं को न्यार है
जैसे कैसे….।।3।।

दुधारू पशुओं की नहीं नस्लों को बनाते हैं
खाली पड़े खेत नहीं उपज को बढ़ाते हैं
दूसरे देशों से रोटी मांग-मांग खाते है
इस निष्कृष्ट जीवन में भी जरा ना शर्माते हैं
शोभाराम निराधार जिन्दगी धिक्कार है
जाने कैसे…।।4।।