ढली-ढली रे उमर तेरी ढली रे
ढली-ढली रे उमर तेरी ढली रे
ढली दो दिन का है खेल खत्म हो रहा है
तेल होने जिन्दगी की रेल फेल चली रे । टेक ।।
तैने सोने में समय गवांया जागा नहीं
तुझे बहुत जगाया गये साथी जो थे
गैल खत्म हुई चहल पहल रौनक
जिन्दगी की आज सारी रली रे ।।1।।
बनता हो तो यत्न बनाले
सफर करना है तो टिकट कटाले
हुआ गाडियों का मेल यात्रियों की धका पेल
टिकट लेने में मची है खल बली रे।।2।।
बिना टिकिट न काम सरेगा,
टी.टी. रास्ते में चैक करेगा
बिना टिकिट हो जेल घले नाक में
नकेल मान राय तुझे दे रहा हूं भली रे।।3।।
यदि पकड़ी नहीं गाड़ी छुटगी,
सत्य समझ लेना सारी दौलत लुटगी
शोभाराम कष्ट झेल-नित्य सूखे डंड पेल
कर्म रेख एक इंच नहीं टली रे।।4।।










