ए नौ जवां, ए नौ जवां तेरे घर के पास ही है
ए नौ जवां, ए नौ जवां
तेरे घर के पास ही है
लगी युद्ध की अग्र
एक झोंके में बना देगी,
तेरे घर को जो भस्म
एक बात का फिक्र है,
एक बात का है गम
दीवाली के दीपक कभी,
मनाने लगें मातम।।1।।
जैसे को तैसे की अदा,
अब तू कर रसम जो
आधियां उठी हैं उन्हें,
जल्दी कर खतम।।2।।
रक्षा का भार भूल कर,
रक्षक को है वहम तब ही
तो बढ़ रहे हैं यहां,
जुल्म और सितम ।।3।।
जुल्मों के सामने कभी,
गर्दन न खाये खम प्रेमी
वतन के हो सभी,
जब तक है दम में दम।।4।।










