जीने या मरने का कोई मोह नहीं है प्राणों में

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जीने या मरने का कोई मोह नहीं है प्राणों में

जीने या मरने का कोई
मोह नहीं है प्राणों में
बढ़ते जाते वीर सिपाही
आंधी और तूफानों में
भारत माता के रक्षक ये
नहीं काल से डरते हैं
रूकना झुकना इन्हें नहीं
आता जो कहते हैं
करते है बुलन्द हौंसले भरे हुये है
इन सबके अरमानों में।।1।।

सारे जग में धूम मची है
इनकी शान निराली है
इन्हे प्यार से गले लगाती
उपवन की हरियाली है
मस्त हो रहे हैं गा-गा कर
देश प्रेम की तानों में।।2।।

गंगा यमुना की लहरों से
कभी ना रूकने वाले हैं
बाधाओं को देख मार्ग में
कभी न झुकने वाले है
लक्ष स्वयं खिंच कर आजाये
इनकी तीर कमानों में ।।3।।

पहाड़ों को राई कर दें,
और ग्राम बसा देवें जल में
आग में बाग लगा देवें
सागर को भरलें आंचल में
बड़े-बड़े अरमान छिपे हैं
सभी भारतीय जवानों में
बढ़ते जाते वीर सिपाही
आंधी और तूफानों में।।4।।