कैसे मिला है यह तन तुझको
कैसे मिला है यह तन तुझको कभी ना किया विचार
प्रभु भक्ति बिन जीवन है बेकार।। टेक ।।
अन गिन शुभ कर्मों से मानव देह मिली
जड़ क्यों काट रहा जीवन की कली खिली
अमूल्य मानव देह निधि को समझले अब भी सार
प्रभु भक्ति बिना जीवन है बेकार ।।1।।
कितने आये यहां यात्री चले गये
काल रूपि चक्की के अन्दर दले गये
इच्छा तजकर फल पाने की मेहनत कर हर बार
प्रभु भक्ति बिन जीवन है बेकार ।।2।।
सोचना था जो सोच लिया अब चल निकल
नीचे गहरी खाई है तू मत फिसल
प्रभु का उर विश्वास अटल लेकर मंजिल को पार
प्रभु भक्ति बिन जीवन है बेकार ।।3।।
लज्जा भय शंका जिसमें वह कार्य तुझे
कभी नहीं करने चाहियें कहे धर्म तुझे
शोभाराम प्रेमी कहे करले जीवन का उद्वार
प्रभु भक्ति बिन जीवन है बेकार ।।4।।










