देखो यह जमाना कैसा पापी हो गया

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देखो यह जमाना कैसा पापी हो गया

देखो यह जमाना कैसा पापी हो गया
बढ़ रही बेचैनी आज हर व्यक्ति निराश है
सत्य प्रेम न्याय खत्म, कहीं न विश्वास है
सारा ही संसार आपाधापी हो गया।।1।।

पंच और प्रधान सत्य बोलने से नाटें हैं
लोभ के वश होकर भाई भाई का सिर काटें हैं
जिसको देखो लक्ष्मी का जापी हो गया।।2।।

त्राहिमाम् त्राहिमाम् चारों ओर शोर है
मानवता समाप्त आज दानवता का जोर है
जीवन का उद्देश्य केवल खाना-पीना हो गया।3।

होकर भयभीत प्रेमी बोले मन्द-मन्द सा
बच जावे संसार यदि स्वामी दयानन्द सा
आज पैदा विश्व में प्रतापी हो गया।।4।।