मुसाफिर क्यों पड़ा सोता

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मुसाफिर क्यों पड़ा सोता

मुसाफिर क्यों पड़ा सोता
भरोसा है नहीं पल का।

दमादम बज रहा डंका
तमाशा है चलाचल का।।
सुबह जो तख्त शाही पर
बड़े सजधज के बैठे थे
दोपहर बाद में उनका
हुआ वास जंगल का।।1।।

कहां हैं राम और लक्ष्मण
कहां लंकापति रावण
कहां हनुमान से योद्धा
पता जिनके न था बल का।।2।।

उन्हें भी काल ने खाया
तुम्हें भी काल खायेगा
सफर सामान का उठाकर
बनाले बोझ को हलका।।3।

जरा सी जिंदगी पर तू
इतना मान कर मूर्ख उमर
यह बीत जा पल में कि
जैसे बुलबुला जल का।।4।।

नसीहत मान ले प्रेमी उमर
पल पल में कम होती
जो करना आज ही कर ले
भरोसा है नहीं कल का।।5।।