जरा सी देर को रोको
जरा सी देर को रोको
ऐ कातिल अपने खंजर को।
मेरा ले लेगा फोटू यह
कहो उस फोटोग्राफर को।।
खड़े हों मात कोरा भागमल
वालिद अति दुख में
जोड़कर हाथ दोनों
कर रहे हों याद ईश्वर को।।1।।
हथकड़ी हाथों में पैरों में
बेड़ी और गले में
तोक हुआ उद्यत हकीकत
सिर कटाने पहन जेवर को।।2।।
वतन के दर्द पर अकसीर
मरहम वन के तन मेरा
लगे जब इससे बढ़कर और
क्या देखूं मैं अवसर को।।3।।
धर्मवेदी बना प्रेमी आहुति
बन के तन मेरा स्वाह के
साथ वीरता से दिखा
पिता मात ब्रादर को।।4।।










