यह कैसी राजनीति है

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यह कैसी राजनीति है

यह कैसी राजनीति है
जिसमें धर्म है न प्रीति है।
सारा मतलब का व्यवहार है,
ऐसी नीति को धिक्कार है।। टेक ।।

गिरगिट की तरह रोज
बदल-बदल करके रंग
भोली जनता को ठगने के
नये नित्य बनायें ढंग
अपनी और औरों की भी
जिन्दगी में गेरें रंग
जिसमें ज्यादा चालाकी भरी हो,
इज्जत हो वाकी कहें यह नीति में
होशियार है ऐसी नीति को…।।।।।

साधुओं के भेष में भी
लफंगों की लार फिरै
पादरी पुजारी मुल्ला
बने बेशुमार फिरें
नेताओं का रूप धार
अनेकों बदकार फिरें
जब भी लग जाये मौका
तब ही दे भागें धोखा कहें
नीति का चमत्कार है ऐसी
नीति को धिक्कार है।।2।।

इसीलिये कोई नहीं
किसी पर विश्वास करै
यदि कोई किसी ऊपर
विश्वास का साहस करै
विश्वास का साहस करने
वाला अपना नाश करै
भूले कर्तव्य इन्सानी जहां
देखे वहीं बेईमानी निश दिन
बढ़ रहा अत्याचार है,
ऐसी नीति को धिक्कार है।।3।।

मनु के विधान में
प्रधान मानी दंड नीति
दंड से पाखंड मिटे
मिनटों में भाग जाये अनीति
कवियों ने सत्य कहा
भय के बिना नहीं प्रीति
जो चाहो मिटे बुराई
करो दंड में कुछ सख्ताई
प्रेमी का सही विचार है
ऐसी नीति को धिक्कार है।।4।।