जो सो गये उन्हें जगाना है

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जो सो गये उन्हें जगाना है

जो सो गये उन्हें जगाना है,
जो गिर गये उन्हें उठाना है।
आज विश्व के घर-घर अन्दर
वैदिक नाद जगाना है।।

सावधान होकर नारा
लगाते आ रहे जमानों से
देख लिया कुछ नहीं होगा
इन थोथे व्याख्यानों से
अब कुछ करके दिखलाना है,
भूलों को राह बताना है
आज विश्व के घर-घर अन्दर
वैदिक नाद बजाना है।।1।।

जाति-पांति ऊंच-नीच
सब घृणा द्वेष मिटा करके
प्रान्तवाद और भाषावाद का
भयंकर भूत भगा करके
प्रेम का श्रोत बहाना है
बिछड़ों को गले लगाना है
आज विश्व के घर-घर अन्दर
वैदिक नाद बजाना है।।2।।

ब्राह्मण हो विद्वान देश में,
क्षत्री वीर बलवान बनें
वैश्य धनी और दानी उदार,
यहां भामा सेठ समान बनें
ऐसा प्रोग्राम बनाना है
खतरे से देश बचाना है
आज विश्व के घर-घर अन्दर
वैदिक नाद बजाना है।।3।।

सार्वभौम में शोभाराम सदाचार
सभ्यता संस्कृति वैदिक ही
अपनायेंगे सबकी हो धार्मिक
मनोवृत्ति जीवन का ही
निशाना है फिर किससे घबराना है
आज विश्व के घर-घर अंदर
वैदिक नाद बजाना है।।4।।