जिस देश में हमने जन्म लिया

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जिस देश में हमने जन्म लिया

जिस देश में हमने जन्म लिया
उस देश के हैं रखवाले।
जब जब भी कभी इस देश पै
संकट के आसार नज़र आये।
अंधकार हुआ प्रलय जैसा
आपत्ति के बादल छाये॥
लोहे से लोहा टकराया खड्ग
झनक झनक झनझना उठे।
हे मातृ भूमि जय हो तेरी
स्वर ओठों के गुन गुना उठे॥1॥

रिपु दल की चुनौती सुनकर के
सब वीर शस्त्रों को चूम उठे।
रण भेरी की आवाज को
सुन केसरिया बाणे झूम उठे॥
जब देखी पिया रण को
जाते संग चली आर्या ललनायें।
दुश्मन रण भूमि छोड़ भगा
जब देखी सामने दुर्गायें ॥2॥

श्रीराम कृष्ण की जन्म भूमि
प्रताप शिवा की शान है ये।
जो बसता है इस देश में हर
भारतवासी का प्राण है ये॥
इस देश की आजादी के
लिये यहाँ भगतसिंह बलिदान हुआ।
श्रीलाल बहादुर शास्त्री भी
इसके लिये कुर्बान हुआ॥3॥

जिस देश की धरती पर हमने
घुटनों के बल चल खेल किया।
खाकर के पले हैं अन्न जिसका
हम और सुधा सम नीर पिया॥
पर्वत हैं जहाँ ऊँचे ऊँचे
गंगा यमुना की धारा है।
कश्मीर कारगिल टाईगरहिल
‘बृजपाल’ ये देश हमारा है।
जिसमें हमने जन्म लिया ॥4॥
उस देश के हम रखवाले।

वार्ता- इधर भगतसिंह आदि की
मिलाई आखरी थी।
भगतसिंह का पिता किशन
सिंह माता विद्यावती आखिरी
मिलाई को जेल पर आते हैं
माँ इच्छा व्यक्त करती है
तेरी शादी न देख सकी।
भगतसिंह क्या उत्तर देता है।