वक्त कहने का नहीं
वक्त कहने का नहीं
कुछ कर दिखाओ हिन्दुओं।
कौम की बिगड़ी हुई
किस्मत बनाओ हिन्दुओं॥
है इसी से राज पिन्हा
बस तुम्हारी जीत का।
अपने अन्दर संगठन
शक्ति बढ़ाओ हिन्दुओं ॥1॥
जिनको ठुकराते रहे हो
आज तक कहकर अछूत।
प्यार से उनको कलेजे से
लगालो हिन्दुओं ॥2॥
आपके भाई जो
बन बैठे हैं ईसाई यवन।
उनको वैदिक धर्म का
अमृत पिलाओ हिन्दुओं ॥3॥
खो चुके हो अपनी
गफलत में अनेकों लाल तुम।
बन सके तो उनको
दोबारा लौटाओ हिन्दुओं॥4॥
शौक से तालीम दो
बच्चों को इंग्लिश की मगर।
हिन्दी से भी नाक भौं
मतना चढ़ाओ हिन्दुओं ॥5॥
तोड़ दो बन्धन पुराने
जाति और पाखण्ड के।
मिस्ल मरदों की तरह
पग को बढ़ाओं हिन्दुओं ॥6॥
जल रही जिन्दा
चिताओं में हजारों देवियाँ।
जिस तरह मुमकिन हो
उनका दुख मिटाओ हिन्दुओं ॥7॥
मानलो कहना मुसाफिर का
ना आपस में लड़ो।
चालबाजी में किसी की
भी ना जाओ हिन्दुओं॥४॥










