गंगा की कसम, जमुना की कसम

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गंगा की कसम, जमना की कसम

गंगा की कसम, जमना की कसम,
यह ताना बाना बदलेगा।
तू खुद तो बदल, तू खुद तो बदल,
बदलेगा जमाना बदलेगा॥
सूरज की मशालें थामे हुए
जिस ओर जवानी चलती है।
पूरब से लगाकर पश्चिम तक
सबकी तकदीर बदलती है॥
महफिल बदलेगी शमां भी
जब हर परवाना बदलेगा॥1॥

आदम का स्वर्ग बना मरघट,
मरघट को स्वर्ग बनाओ तो।
जाओ ममता का एक दिया
कुटिया में अंधेरी जलाओ तो॥
गम बदलेगा जीना आयेगा
मरने का बहाना बदलेगा॥2॥

पतवार संभालो हाथों से
तूफान को आँख दिखाने दो।
बादल भी चाहे जितना गरजे
बिजली को कड़ककर आने दो ॥
मौसम के बदलते ही लहरों का
भी इतराना बदलेगा॥3॥

करने को तो बात अब करते हैं
कतरे भी समुद्र की ही तरह।
कश्ती को बचायें वो डूबें
मझधार में जो लंगर कही तरह ॥
बदलेगी जवानी जिस दिन भी
रोना पछताना बदलेगा ॥4॥

बदली है गुलामी सदियों को
खुशियों में पुराने गम बदले।
अब तक ये हवा भी बदल जाती
अभी तुम बदले नहीं हम बदले।
जब राग अलापोगे अपने
डिस्को का ये गाना बदलेगा ॥5॥