ऐ आर्य तू जीवन में शुभकर्म कमा जाना
दिए लाखों जलाए ऋषि ने इक तू भी जला जाना ॥ ऐ आर्य तू…
परदा जो अकल पर था गुमराह से लोगों का
ऋषि राह पे ले आए दिया ज्ञान वो वेदों का
वेदों को पढ़ना पढ़ाना और सुनके सुना जाना ॥ ऐ आर्य तू…
पत्थर और ढेलों से आघात किया ऋषि पे
विष और खंजर से किया विश्वासघात मुनि पे
सन्तों पे चले खंजर तू अपने सीने पर लाना ॥ ऐ आर्य तू..
नारी को दिया अधिकार दु:खियों का बना गमख्वार
गौ माता के आँसू देख बरसी आँखों से धार
गौ नारी दुःखियों के लिए संसार से टकराना ॥ ऐ आर्य तू…
सच्चाई सरलता थी उपकार था ऋषिवर का
दया और क्षमा का था व्यवहार मुनिवर का
जीवन से दयानन्द के दया प्रेम तू ले आना ॥ ऐ आर्य तू…
लाना था विश्व को ओ३म् ध्वज के तले करके
जाना था जग से जग को बस एक कुटुम्ब करके
संकल्प ऋषि का तुम सार्थक करते जाना ॥ ऐ आर्य तू..










