जब भी प्रभु याद तेरी दिल में बसी जाती है
प्रेम श्रद्धा मेरे मन का दिया जलाती है ॥
पहले मक्सद नहीं समझा था जग में आने का
चक्रव्यूह में न मिला मार्ग निकल पाने का
अब ये जाना के प्रभु तू ही मेरा साथी है ॥ जब भी…
मन के दर्पण में तेरे प्रेम की प्रभु मूरत है
भूल बैठा हूँ प्रभु खुद ही अपनी सूरत मैं
जहाँ देखूँ, मैं छबी तेरी नज़र आती है ॥ जब भी…
चाहे दुःख आए या सुख में ना तुझे भूलूँगा
तेरे ही प्रेम हिंडोले में प्रभु झूलूँगा
देखूँ तुझे पाने की वो शुभ घड़ी कब आती है ॥ जब भी…










