लाखों ही घर शराबों ने सुनशान कर दिये ।

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लाखों ही घर शराबों ने सुनशान कर दिये ।

लाखों ही घर शराबों ने,
सुनशान कर दिये ।
गुलशन कई उजाड़ कर,
विरान कर दिये ।।० ।।

अन्तरा – हर रोज एक शराबी,
जाये शराब पीने ।
पैसे न जब मिले तो,
बीबी के गहने छीने ।
जख्मी दिले मासुम के,
अरमान कर दिये ।।
लाखों ही घर शराबों…।।१।।

बहनों के सामने भी
आये न लाज इनको ।
दे दे न बदुयाएं,
नारीसमाज उनको ।
शरमों हो या शराब पर,
कुर्बान कर दिये ।।
लाखों ही गर शराबों…।।२।।

हम क्या बताएं तुमको,
इतिहास हे गवाही ।
हुई इसी की बदौलत,
यदुवंश की तवाही ।।
क्या-क्या हमारी काम के,
नुकसान कर दिये ।।
लाखों ही घर शराबों…।।३।।

आज देखो दुनियां में,
बड़े-बड़े भट्टियां है।
शराब पानी के पीछे,
गवांते रूपये हैं ।
कितने ही परिवारों को,
शमशान कर दिये ।।
लाखों ही घर शराबों मे…।।