जगत में उसकी मिटी है चिन्ता ।
जगत में उसकी मिटी है चिन्ता ।
जो तेरे चरणों में आ पड़े हैं।
वोही हमेशा हरे-भरे हैं।
जो तेरे चरणों में आ पड़े हैं ।।
जगत् में उसकी… ।।०।।
न पाया राजा बजीर बनकर ।
न पाया तुझको फकीर बनकर ।
उन्हीं को दर्शन हुए है तेरे ।
जो तेरे चरणों में आ पड़े हैं ।।
जगत में उसकी…।।१।।
न पाया तुझको किसी ने बल से,
न पाया तुझको किसी ने छल से।
वही परमपद को पा गये हैं।
जो तेरे चरणों में आ पड़े हैं ।।
जगत में उसकी…।।२।।
किसी ने जग में करी भलाई ।
किसी ने जग में करी बुराई ।
वही सुमार्ग पर चल पड़े हैं।
जो वे चरणों में आ पड़े हैं ।।
जगत में उसकी…।।३।।










