सज धज कर जब, मौत की सहजादी आयेगी।

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सज धज कर जब, मौत की सहजादी आयेगी।

सज धज कर जब,
मौत की सहजादी आयेगी।
ना सोना काम आयेगा,
ना चाँदी आयेगी ।।

छोटा सा है तू,
बड़े अरमान है तेरे।
मिट्टी का तू,
सोने के सामान है तेरे ।।
मिट्टी की काया,
मिट्टी में जिस दिन समायेगी।
ना सोना….।।

पंक्षी है पर तू,
ये पिंजड़ा तोड़ के उड़जा।
माया महल के सारे,
बन्धन तोड़के उड़जा ।।
मौत दिल की धड़कन में,
जब गुन गुनायेगी।
ना सोना….।।

धन दौलत से खाली होंगे,
एक दिन तेरे हाथ।
अन्त समय भगवान,
भजन जायेगा तेरे साथ ।।
उस दिन तुझको,
वेद की वाणी याद आयेगी।
ना सोना…।।

अच्छे किये हैं कर्म,
तूने पाया मानव तन।
पाप में अब क्यों डूबा है ?
ए पापी चंचल मन ।।
पाप की नइया तुझको,
जिस दिन डुबायेगी। ना सोना….।।