सन्तों के मार्ग पर,जब से चलने लगा

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सन्तों के मार्ग पर, जब से चलने लगा

सन्तों के मार्ग पर,
जब से चलने लगा
वेदों का
ज्ञान मुझमें आने लगा ।।
जब से वेद-शास्त्रों को
मैं पढ़ने लगा चित्त से
अन्धविश्वास हटने लगा ।।० ।।

अन्तरा – मन्दिरों- मस्जिदों में जाता रहा,
मूर्तियों-पत्थरों को ध्याता रहा ।
काशि, वृन्दावन, गिरीगोवर्धन
जाता रहा हूं मैं गंगा, गया,
कृष्णा नदी में नहाता रहा हूं मैं,
सोचा जब, तब मेरा दिल
बदलने लगा, जबसे वेद-शास्त्रो
को मैं पढ़ने लगा… ।।१।।

जब से योग साधना को समझ ने लगा
तब से मन आनन्दों से मचलने लगा ।
मन में खुशियां दिलमें ज्योतियां ऐसी
ही छा गई प्रभु की कृपा से उनके
आनन्द का छाया सी छा गई योग
बल से ऊपर मैं उठने लगा ।।
चित्त से अन्धविश्वास हटने लगा ।।
सन्तों के मार्ग पर… ।।२।।