मोक्ष पाने को दिल चाहता है
मोक्ष पाने को दिल
चाहता है हे प्रभु-२ तुमको
जपने का दिल करता है।
तुम हो कहां पे दिल ढूंढ़ता है ये…।।
तुमको जपने का दिल… ।।०।।
अन्तरा – तुमने वेदों का ज्ञान दिया है हमें,
हमें पढ़ने की काबिल किया है तूने,
जाने क्या बात ऐसी है तुझमें भगवन्-३
ये जीव तेरे लिए ही विचरता है।
तुमको जपने का दिल… ।।१।।
तुमको ना जपूँ तो मुझको लगे
वैचेनियां ध्यान लगाऊं तो बढ़ती है
खुशहालियां हो ना जाओ कहीं
तुम मुझसे जुदा-३ येसी बातों से
दिल डरता है प्रभु हे तुमको
जपने का दिल…।।२।।










