मुझे ध्यान न आये…हो… २
मुझे ध्यान न आये…हो… २
मुझे याद न आये, कोई जाये ढूंढ़ के
लाये न जाने कहाँ मन खो गया-२
अन्तरा – ये मन कैसा है
कैसे तुम्हें बताऊँ मैं ।
संध्या हवन करते दिन गुजारूं मैं ।
कहते हैं सन्ध्या से मन शुद्ध होता है,
योग क्रिया से आत्मा की शुद्धि होती है।
करो जी करो संध्या हवन,
करो सदा ईश्वर भजन-२ कोई
ध्यान लगायें, कोई योग रचाएं ।
कोई जाये जरा ढूंढ़ के लाए ।
न जाने कहाँ मन खोगया-२
मुझे ध्यान न… ।।१।।
ऋषि मुनि-योगी सारे योग
लगाये हैं योग बल से ही
मोक्ष आनन्द वो पाये हैं।
उनके ही कदमों पर चलेंगे हम सभी,
जीवन में आये न कोई रोग
व्याधि करे जी करे हम योग साधन,
करे सदा संध्या वन्दन कोई
संध्या कराये, कोई यज्ञ कराये ।
कोई जाये जरा ढूंढ़ के लाए ।
न जाने कहां मन खो गया-२
मुझे ध्यान न… ।।२।।










