सण्डे हो या मण्डे कभी न खाना अण्डे।

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सण्डे हो या मण्डे कभी न खाना अण्डे।

सण्डे हो या मण्डे कभी न खाना अण्डे।
नहीं तो खाने पड़ेंगे इक दिन यमदूतों के डण्डे।
संडे हो या मंडे……

१. क्या तुमने जाना है अण्डों के अन्दर क्या है।
मुर्गी जो खाती है वह गन्दा माल भरा है।
अण्डे खाकर करते रहते झगड़े और वितण्डे……..
संडे हो या मंडे……

२. अण्डों में होते हैं मुर्गा मुर्गी के बच्चे।
बच्चे खाने वाले क्या काम करेंगे सच्चे।
हत्या कर के चले गाड़ने मानवता के झण्डे।
संडे हो या मंडे……

३. बड़े बड़े वैज्ञानिक और डॉक्टर लोग बताते।
इन से नज़ला ख़ाँसी और हृदय रोग बढ़ जाते।
अस्पताल में जाकर होते हाथ पाँव सब ठण्डे…..
संडे हो या मंडे……

४. चन्दन सी काया में रोगों ने डाला डेरा।
जीवन की गाड़ी को जब विघ्नों ने आ घेरा।
किसी काम न आवेंगे तब लोगों के हथकण्डे………
संडे हो या मंडे……

५. जीवों के हत्यारे जो जो भी पाप करेंगे।
ऐसा दण्ड मिलेगा कानों पर हाथ धरेंगे।
क्या मौलाने और पादरी क्या ग्रन्थी क्या पण्डे…..
संडे हो या मंडे……

६. भारत वालों ने जो अण्डे खाना न छोड़ा।
अर्जुन भीम न होंगे न राम लखन सा जोड़ा।
‘पथिक’ देश में बढ़ जाएँगे आवारा मुस्टण्डे………
संडे हो या मंडे……