बैठ सत्संग में रंग प्रभु रंग में
बैठ सत्संग में रंग प्रभु रंग में,
गाएँ प्रभु-नाम प्रेम की उमंग में ॥
बह रही जो प्रेम की नहायें इस गंग में ॥
गाएँ प्रभु-नाम……..
दुनियाँ के झंझटों से मन को हटा,
प्रभु के चरणों में चित्त को लगा।
जीवन बिताएँ सुन्दर से ढंग में ॥
गाएँ प्रभु-नाम………
सत्य और झूठ का भेद जान ले,
भला क्या है बुरा क्या है यह पहचान ले।
जीवन बिताएँ सुंदर से ढंग में ॥
गाएँ प्रभु-नाम……..
प्रभु गान करें नित्यप्रति हम,
तभी भव-सागर से तर जाएँ हम ।
भक्तों ने यह कहा प्रेम की तरंग में ॥
गाएँ प्रभु-नाम………










