वेद विद्याओं की है खान।
वेद विद्याओं की है खान।
वेद में है परिपूर्ण ज्ञान ॥
वेद से उपजे ज्ञान अनन्त ।
पृथिवी से सूर्य पर्यन्त ॥
पर अपरा विद्या के भेद ।
भिन्न भिन्न बतलावे वेद ॥
जीव ईश्वर प्रकृति के लक्षण।
वेद से निर्णय होत विलक्षण ॥
तीन काण्ड का सब सिद्धान्त ।
वेद बताते हैं भली भाँत ।।
वेद सनातन धर्म का ग्रन्थ।
वेद है मोक्ष द्वार का पन्थ ॥
वेद से सुख सम्पत हो प्राप्त।
प्रतिपादित करते हैं आप्त ॥
वेद में गायत्रादि छन्द ।
शब्द अर्थ सारे सम्बन्ध ॥
उसने यह सब किये प्रदान।
जिसको कहते शक्तिमान् ॥
वेद अविद्या का करे नाश।
सब विद्या का करे प्रकाश ॥
मन में रखके दृढ़ विश्वास।
चार वेद का पढिए भाष ॥
वेदों के सुनसुन उपदेश।
सबका पूरा हो उद्देश्य ॥
पञ्च महायज्ञ आदि कर्म।
प्राप्त होगा वैदिक धर्म ॥
वेद मिटावे संशय भ्रम।
वेद निरूपण करता ब्रह्म ॥
वेद का जग में बड़ा प्रताप।
सदा उचित है वेद का जाप ॥
वेद अर्थ का करो विचार।
‘अमींचन्द’ प्रतिदिन बारम्बार ।।
महिमा वेद अमाप अतोल।
वेद पदारथ हैं अनमोल ॥










