सब वेद पढ़े सुविचार बढ़े

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सब वेद पढ़े सुविचार बढ़े

सब वेद पढ़े सुविचार बढ़े,
बल पाये चढ़े सब ऊपर को ॥
अविरुद्ध रहें, ऋजु पन्थ गहुँ,
परिवार कहें वसुधा भर को ॥

ध्रुव धर्म धरें, पर दुःख हरें,
तन त्याग तरें भवसागर को।
दिन फेर पिता वर सविता,
हम आर्य करें जगती भर को ॥