अखिलाधार “अमर” सुखधाम
अखिलाधार “अमर” सुखधाम,
एक सहारा तेरा नाम ।
कैसी सुन्दर सृष्टि बनाई,
सूर्य-चन्द्र-सी ज्योति जगाई ॥
बहुत मनोहर वायु बहाई एक से
एक विलक्षण काम ॥……
शीतल, सरस सुधा सम पानी,
अमृत-अन्न खाये सब प्राणी।
गुण गावें जानी अरु ध्यानी,
जपें निरन्तर आठों याम ॥…….
पत्र-पत्र रंग-रूप निराला,
पुष्प-पुष्प में गन्ध विशाला।
फल-फल पृथक्, प्रेमरस प्याला,
लीला तेरी ललित ललाम ॥…..
तुम हो ‘अमर’ सुपथ के स्वामी,
मैं हूँ अमर कुपथ अनुगामी।
एक नाम के दोनों नामी,
मैं गुण रहित आप गुणधाम ॥….










