बेशुमार फूल हैं फुलवाड़ी एक है।

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बेशुमार फूल हैं फुलवाड़ी एक है।

बेशुमार फूल हैं फुलवाड़ी एक है।
बहुत मुसाफिर हैं रेलगाड़ी एक है।


पृथ्वी सूर्य चाँद तारे आसमान में।
देखिए विचित्र खेल इस मैदान में।
गेंद हैं अनेक पर खिलाड़ी एक है।
बहुत मुसाफिर हैं रेलगाड़ी एक है…

एक ही ज़मीन में कटहल भी कपास भी।
नींबु ईख ले रहे खटास भी मिठास भी।
साथ साथ फूल काँटे झाड़ी एक है।
बहुत मुसाफिर हैं रेलगाड़ी एक है..

सज्जनों का मान तो बढ़ाया देखिए।
पापियों को दण्ड दे रुलाया देखिए।
एक शै संवार तो बिगाड़ी एक है।
बहुत मुसाफिर हैं रेलगाड़ी एक है…

काम हैं अनेक तो परिणाम एक है।
बहुत हैं परिणाम मगर काम एक है।
‘पथिक’ दया न्याय की कुल्हाड़ी एक है।
बहुत मुसाफ़िर हैं रेलगाड़ी एक है…