ओ३म् अक्षर अखिलाधार जिसने ज्ञान लिया।
ओ३म् अक्षर अखिलाधार
जिसने ज्ञान लिया।
एक अखण्ड, अकाय असंगी,
अद्वितीय, अविकार व्यापक,
ब्रह्म, विशुद्ध, विधाता, विश्व-विश्व
भरतार को पहचान लिया…..
भूतनाथ, भुवनेश स्वयम्भू,
अभय-भाव-भण्डार,
नित्य-निरञ्जन, न्याय नियन्ता।
निर्गुण निगमागार मनु को मान लिया..
करूणाकन्द, कृपालु, अकर्त्ता,
कर्महीन, करतार परमानन्द-पयोधि,
प्रतापी, पूरण परमोदार-से
सुख दान लिया….
सत्य सनातन प्रभु शंकर को
समझा सबका सार,
अपना जीवन बेड़ा उसने
भवसागर से पार
करना ठान लिया………










