नाथ तू ही एक सारे विश्व का आधार है।
नाथ तू ही एक सारे
विश्व का आधार है।
चल रहा तेरे इशारे
पर सकल संसार है।
चाँद सूरज और सितारे
तेरी महिमा गा रहे,
तेरी शक्ति का कहीं
कोई न पारावार है।
भर दिया अनगिनत
रत्नों से समन्दर का हृदय,
और पृथ्वी का खजाना
भी अनन्त अपार है।
सबके सब प्राणी
बराबर हैं तुम्हारे सामने,
तू ही जड़ चेतन का
रक्षक तू ही पालनहार है।
वेद वाणी से ज़माने को
सुसज्जित कर दिया,
सत्य विद्याओं का जो
सीमा रहित भण्डार है।
इक हमें नर तन दिया
उस पर हज़ारों नेमतें,
क्या कहें कितना बड़ा
हम पर तेरा उपकार है।
आ रहे कितने “पथिक”
दुनियां में जीने के लिए,
है सफल जीवन उसी का
जिसका तुमसे प्यार है।










