जिसमें तेरा नहीं विकास वैसा विकसा फूल नहीं है।

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जिसमें तेरा नहीं विकास वैसा विकसा फूल नहीं है।

जिसमें तेरा नहीं विकास
वैसा विकसा फूल नहीं है।
मैंने देख लिया सब ठौर,
तुझ-सा मिला न कोई और ॥
पाया तू सबका सिरमौर,
प्यारे इसमें भूल नहीं है ॥
जिसमें तेरा नहीं विकास..

तेरे किंकर करुणाकन्द,
पाते हैं अविरल आनन्द ।
तुझसे भिन्न सच्चिदानन्द
कोई मङ्गलमूल नहीं है ॥
जिसमें तेरा नहीं विकास….

प्रेमी भक्त प्रमाद विसार,
माँगें मुक्ति पुकार-पुकार ।
सबका होगा सर्वसुधार,
जो पै तू प्रतिकूल नहीं है ।
जिसमें तेरा नहीं विकास….

जिनको मिला बोध विश्राम,
जीवन्मुक्त बने निष्काम।
उनको हे ‘शंकर’ श्रीधाम,
तेरा न्याय त्रिशूल नहीं है।।
जिसमें तेरा नहीं विकास ….