भजनवा ऐसा होय हमार मन का

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भजनवा ऐसा होय हमार मन का

भजनवा ऐसा होय हमार मन का
बचन का और कर्म का सहस्वर बोले
तार गा जीवन को गीत बना कर
शंकरमय संगीत सजाकर रसना से
रस बरसा सरसा जैसे पड़े फुहार ॥१॥

भद्र भावना भरके उर में नित्य
उडेलो जगती भर में सोत्र शान्ति
का उद्गम बन प्यासा है संसार ।।२।।

चिन्तन से चित्त चोर भगेगा शुभ
कर्मों की ओर लगेगा परमेश्वर का
पकड सहारा नैय्या हो उस पार ।।३।।

राग द्वेष छल बैर बिसारो हो निर्मल
निश्चल चित हमारो भक्ति वो जो
तुझे सुरेन्द्र पहुंचा दे उस पार ।।४।।