इस जग की भटकती गलियों में
इस जग की भटकती गलियों में
अनमोल रतन को मत खोना
देने को सुगन्धि भेंट मिला
मुस्काते चमन को मत खोना
कितने ही तरसते रहते हैं दो
बोल मधुर सुनने के लिये
रसहीन वचन उच्चार कभी
रसना का मधुवन मत खोना
व्यवहार किये जा कुछ ऐसा
जिसमें हो झलक मानवता
की उद्देश्य हीन दानवता के
कर्मों से नर तन मत खोना
ईश्वर ने दिये उपहार सभी
मानव को सुरेन्द्र सुख के लिये
दुरपयोग ही दुःख का कारण है
ऋषियों के कथन को मत खोना










