प्रभु चरणों में समय बिताओ, पल पल आए काल विकराल….
रे मना ॥ प्रभु ॥
जीवन की घड़ियाँ चलती रहेंगी, मृत्यु की ओर बढ़ती रहेंगी
पापों से अपने मन को हटाओ
पञ्चशत्रु से निज मन को बचाओ…रे मना ॥ प्रभु ॥
जीवन संग्राम गौरव प्रधान, ओ३म् का नाम अमृत समान
प्रभु चरणों में जीवन विताओ
आसक्तियों से मन को हटाओ….रे मना ॥ प्रभु ॥
वेद स्वाध्याय ऋषियों की राय, कर्म-योगी का ईश्वर सहाय
ज्ञान सरिता को घरघर में बहाओ
शुभ कर्मों से शुभ जीवन बनाओ….र मना ॥ प्रभु ॥
मानव का वैभव वेद विचार, मुक्ति के मार्ग का वेद आधार
ऋषियों के वैदिक पथ चलते ही जाओ
वेद मन्त्रों से निज वाणी सजाओ….रे मना ॥ प्रभु ॥
(कर्मयोगी) निष्काम कर्म करनेवाला (पश्चशत्रु) काम क्रोध लोभ मोह अहंकार पाँच शत्रु (गौरव)
सम्मान, आदर, बड़प्पन, महत्व (आसक्ति) अनुराग, अवलम्बन, (वैभव), यश, दौलत, ठाठबाट










